जीरो नोट की शुरुआत 2007 में की गई थी। वही पर  देखे तो 2014 में इसको बंद कर दिया गया था। इसके बाद आपको पता ही है कि 2016 में नोटबंदी हुआ था उसे टाइम 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए गए थे और उससे पहले ही जीरो नोट को छप चुके था। 

2007 में चेन्नई के गैर सरकारी संगठन (NGO), और 5 पिलर (5th Pillar) के द्वारा शून्य रुपये का नोट छापा था। इस नोट की कोई भी मूल्य नहीं है इसके अलावा जान लो कि आप इस चीज से कुछ भी नहीं खरीद सकते हो।

इस नोट को लेकर कोई भी भारत सरकार या रिजर्व बैंक के द्वारा गारंटी नहीं दिया गया है। इस नोट में जिस भाषा का उसे किया गया है जैसे की हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलयालम के साथ तेलुगू का भी प्रयोग किया गया है।